Thursday, November 12, 2009

क्यों है भारत विश्व में पैंतालीसवें नम्बर पर ?

लंदन के लेगटम संस्थान और आॅब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 79 मानकों को आधार मान कर विश्व के 104 देशों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाया है उसमें भारत के लिये एक शुभ सूचना है। इन 104 देशों में विश्व की 90 प्रतिशत आबादी रहती है और इस सूची में भारत को पैंतालीसवां स्थान मिला है। सामाजिक मूल्यों के मामले में भारत को विश्व में पहले स्थान पर रखा गया है।
यदि 104 देशों की सूची में से विकसित समझे जाने देशों को निकाल दें और केवल विकासशील देशों की सूची देखें तो समृद्धि के मामले में भारत को प्रथम 10 शीर्ष देशों में स्थान मिला है। विश्व समृद्धि की सूची में भारत को 45वां स्थान मिला, यह शुभ सूचना नहीं है, शुभ सूचना यह है कि सकल विश्व को आर्थिक मोर्चे पर कडी चुनौती दे रहे चीन को 75वां स्थान मिला है। आगे बढ़ने से पहले बात उन मानकों की जिनके आधार पर यह रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाया गया है। देश का सामाजिक ढांचा, परिवार व्यवस्था, मैत्री भावना, सरकार के आर्थिक सिद्धांत, उद्यमों के लिये अनुकूल वातावरण, विभिन्न संस्थाओं में लोकतंत्र, देश की शासन व्यवस्था, आम आदमी का स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक मूल्य और सुरक्षा आदि कुछ ऐसे महत्वपूर्ण मानक हैं जिनकी कसौटी पर भारत संसार में 45वें स्थान पर ठहराया गया है और चीन 75वें स्थान पर।
भारत के अन्य पÞडौसी देशों- पाकिस्तान, बांगलादेश, अफगानिस्तान, बर्मा, श्रीलंका, नेपाल और भूटान आदि की स्थिति तो और भी खराब है। ऐसा कैसे हुआ? इस प्रश्न का उत्तार पाने के लिये एक ही उदाहरण देखना काफी होगा। पिछले दिनों जब चीन ने अपना 60वां स्थापना दिवस मनाया था तब राष्ट्रीय फौजी परेड में भाग ले रहे सैनिकों की कॉलर पर नुकीली आलपिनें लगा दी थीं ताकि परेड के दौरान सैनिकों की गर्दन बिल्कुल सीधी रहे। किसी भी नागरिक को इस फौजी परेड को देखने के लिये अनुमति नहीं दी गई थी।
लोगों को घरों से निकलने से मना कर दिया गया था, बीजिंग में कर्फ्यू जैसी स्थिति थी। लोग यह परेड केवल अपने टी.वी. चैनलों पर ही देख सकते थे। इसके विपरीत हर साल 26 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में भारत के सिपाही गर्व से सीना फुलाकर और गर्दन सीधी करके चलते हैं, हजारों नागरिक हाथ में तिरंगी झण्डियां लेकर इन सिपाहियों का स्वागत करते हैं और करतल ध्वनि से उनका हौंसला बढ़ाते हैं।
यही कारण है कि कारगिल, शियाचिन और लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों से लेकर बाड़मेर और जैसलमेर के धोरों, बांगला देश के कटे फटे नदी मुहानों और अरब सागर से लेकर बंगाल की खाÞडी तक के समूचे तटवर्ती क्षेत्र में भारत के सिपाही अपने प्राणों पर खेलकर भारत माता की सीमाओं की रक्षा करते हैं। हमारी सरकार सैनिकों के कॉलर पर तीखी पिनें चुभोकर उनके कॉलर खड़े नहीं करती, देश प्रेम का भाव ही सिपाही की गर्दन को सीधा रखता है। भारत और चीन का यही अंतर हमें 45वें और चीन को 75वें स्थान पर रखा है।

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